Friday, March 19, 2010

हमारा नया घर

यह चिट्ठा 2005 में खोला गया था. तब से आज तक चिट्ठों की तकनीकी में अंतर आ गया है, जिससे इस पर नयी पोस्ट लिखने में दिक्कत होने लगी थी. कुछ महीनों पहले, इस चिट्ठे को वर्डप्रेस पर ले जाने की सोची थी, लेकिन सब कार्य पूरा हो पाता इससे पहले ही, पुराने चिट्ठे को बदल कर सही करने का तरीका समझ में आ गया था और वर्डप्रेस जाने का कार्यक्रम स्थगित कर दिया था. पर लगता है कि इस चिट्ठे का अंतिम समय आ ही रहा था.

पिछले महीने ही ब्लोगर का संदेश मिला कि अगली 1 मई 2010 से एफटीपी से छापने की सुविधा स्माप्त की जा रही है, यानि यह चिट्ठा नहीं छप पायेगा. इसी लिए ब्लागर पर नया चिट्ठा बनाया गया है जिसमें एफटीपी की आवश्यकता नहीं पड़ती. आगे से सभी पोस्ट वहीं छपेंगी: http://jonakehsake.blogspot.com/



Comments:
मुझे एक बात समझ नहीं आ रही, आप अपने ही डूमेन पर वर्डप्रेस स्थापित करने से घबरा क्यों रहे है?
 
बड़ी कष्टदायक बातें हैं. मुफ़्त में सुविधाएँ देते हैं, मगर अपरिहार्य कारणों से बन्द कर देते हैं. पहले याहू जियोसिटीज बन्द हुआ, फिर गूगल पेजेस. अब यह. वैसे तो और भी प्रकल्प बन्द होते रहे हैं, मगर ये तो लोकप्रिय थे और चल ही रहे थे. ख़ैर... दान की बछिया थी, कब तक दूध देती...

वैसे, आपसे
 
संजय, वर्डप्रेस पर अपने डोमेन पर चिट्ठा छापने के लिए माईएसक्यूएल के डाटाबेस सर्वर पर लेने पड़ेंगे, जिनकी अलग से कीमत देनी होगी. जहाँ तक मुझे समझ में आया, हर चिट्ठे के लिए, विषेशकर, जो विभिन्न भाषाओं में हैं, अलग से माईएसक्यूएल डाटाबेस बनाना पड़ेगा. मेरा सर्वर का कानट्रेक्ट 2013 तक का है, उसे बदलना होगा. सब कर लूँ तो किसी की तकनीकी सहायता माँगनी होगी जो यह सब करने में मदद करे. यही सब सोच कर वर्डप्रेस का विचार छोड़ दिया था.

रवि तुम्हारी टिप्पणी अधूरी रह गयी लगती है. शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद.
 
साथियो!
आप प्रतिबद्ध रचनाकार हैं. आप निसंदेह अच्छा लिखते हैं..समय की नब्ज़ पहचानते हैं.आप जैसे लोग यानी ऐसा लेखन ब्लॉग-जगत में दुर्लभ है.यहाँ ऐसे लोगों की तादाद ज़्यादा है जो या तो पूर्णत:दक्षिण पंथी हैं या ऐसे लेखकों को परोक्ष-अपरोक्ष समर्थन करते हैं.इन दिनों बहार है इनकी!
और दरअसल इनका ब्लॉग हर अग्रीग्रेटर में भी भी सरे-फेहरिस्त रहता है.इसकी वजह है, कमेन्ट की संख्या.

महज़ एक आग्रह है की आप भी समय निकाल कर समानधर्मा ब्लागरों की पोस्ट पर जाएँ, कमेन्ट करें.और कहीं कुछ अनर्गल लगे तो चुस्त-दुरुस्त कमेन्ट भी करें.

आप लिखते इसलिए हैं कि लोग आपकी बात पढ़ें.और भाई सिर्फ उन्हीं को पढ़ाने से क्या फायेदा जो पहले से ही प्रबुद्ध हैं.प्रगतीशील हैं.आपके विचारों से सहमत हैं.

आपकी पोस्ट उन तक तभी पहुँच पाएगी कि आप भी उन तक पहुंचे.
 

Post a Comment

यह चिट्ठा अब http://jonakehsake.blogspot.com/ पर चला गया है. यहाँ पर अब नयी टिप्पणियाँ स्वीकार नहीं की जायेंगी. धन्यवाद.

Note: only a member of this blog may post a comment.



Links to this post:

Create a Link



<< Home

Subscribe to Posts [Atom]