बिस्ट्रिश्की बाबी का संगीत सुनील दीपक, दिसम्बर 2008

बोलोनिया विश्वविद्यालय के संगीत विभाग द्वारा आयोजित विभिन्न देशों के लोक संगीत के कार्यक्रम "दुनिया के स्वर" का प्रारम्भ बुलागारिया के प्राचीन Bistrishki Babiबहुस्वर नारी संगीत दल बिस्ट्रिश्की बाबी के संगीत कार्यक्रम से हुआ. बिस्ट्रिश्की बाबी दल के साथ आयी प्रोफेसर मीला संतोवा ने इस संगीत दल और संगीत पद्धति के बारे में बताया.

प्रोफेसर संतोवा ने 2001 और 2002 के दौरान बिस्ट्रिश्की के इलाके में सांस्कृतिक शौध किया और इसी शौध के आधार पर 2004 में युनेस्को ने बिस्ट्रिश्की बाबी संगीत को "जगत की सांस्कृतिक धरौहर" घोषित किया.

बिस्ट्रिश्की का गाँव बुलगारिया की राजधानी सोफ़िया से करीब दस किलोमीटर दूर बिटोषा पहाड़ पर बसा है. सांस्कृतिक दृष्टि से बुलगारिया का यह भाग आसपास के वातावरण से कटा रहा है जिसकी वजह से यहाँ पुराने संगीत को बचा कर रखना संभव हो पाया. इस संगीत को बहुस्वर संगीत कहा जाता है क्योंकि इसमें संगीत दल के विभिन्न लोग एक साथ अलग अलग स्वरों में गाते हैं. इस तरह का बहुस्वरी संगीत एक समय में यूरोप के पूर्व में ज्योर्जा से ले कर पश्चिम में कोर्सिका तक बहुत प्रचलित था और आज भी कुछ बचे खुचे पुरुष गायक दल हैं जो इस पराम्परा को बचा कर रखे हैं. बुलगारिया का बिस्ट्रिश्की बाबी अकेला संगीत दल जहाँ गायक पुरुष नहीं महिलाएँ रहीं हैं.

बिस्ट्रिश्की की गायकी परम्परा कहीं लिखी नहीं गयी है, केवल यहाँ की औरतों की यादों में हैं जो इसे संभाल कर रखती हैं और नयी आने वाली पीढ़ियों को Bistrishki Babiइसे सिखाती हैं.आजकल जैसा बिस्ट्रिश्की बाबी गुट पहली बार करीब सौ साल पहले बना और तब से आज इसमें तीसरी तथा चौथी पीढ़ी की औरतें हैं. गाँव में विभिन्न उम्र की लड़कियाँ, युवतियाँ यह संगीत सीखती और गाती हैं और अनुभव होने पर वह इस बाबी गुट यानि दादियों के गुट में आती हैं.

हालाँकि आज बहुत तकनीकी तरक्की हो चुकी है पर बिस्ट्रिश्की बाबी अपने संगीत को नयी तकनीकों में नहीं बाँधना संयोजना चाहती हैं, उसके लिए वे पुराने तरीके से ही चलना चाहती हैं. गुट का कहना है कि अगर लड़की ने पहले से ही किसी आधुनिक या शास्त्रीय संगीत पद्धति से गाना सीखा है तो वह पाराम्परिक बहुस्वरीय संगीत नहीं सीख पाती, जिसके लिए गले को अलग बनावट चाहिये. इसलिए यह संगीत वही युवतियाँ और लड़कियाँ सीकती हैं जिन्होंने कोई अन्य संगीत शिक्षा न पायी हो.

बिस्ट्रिश्की बाबी की संगीत परम्परा जीवित संगीत परम्परा है क्योंकि नयी पीढ़ी की युवतियों में इसे सीखने और बना कर रखने में बहुत दिलचस्पी है.

Bistrishki Babiअगर आप ने पहले इस तरह का संगीत कभी नहीं सुना और इसे पहली बार सुनेंगे तो कुछ अजीब लग सकता है, लगता है कि संगीत नहीं कोई उँची आवाज में बात कर रहा है या फ़िर मंत्र पढ़ रहा है. थोड़ी देर सुन कर ही इसकी गहराई समझ आती है. बिस्ट्रिश्की बाबी गुट दो हिस्सों में बँट जाता है, एक तरफ़ चार औरतें दूसरी तरफ़ पाँच. चार औरतों में से एक "चीख" से प्रारम्भ करती है गायन का, फ़िर दूसरी एक औरत "दहाड़" से उसमें जुड़ जाती है, तब "सीमा" बनाने वाली, उसमें स्वर जोड़ती हैं. इस तरह गुट का एक हिस्सा चीन विभिन्न स्वरों में गीत प्रारम्भ करता है. तब दूसरा हिस्सा भी तीन विभिन्न स्वरों में गायन शुरु करता है, जब दोनों हिस्से साथ साथ गाते हें तो विभिन्न स्वर एक के ऊपर एक जुड़ते जाते हैं.

प्रोफेसर संतोवा से संपर्क करने के लिए उनका ईमेल है mila_santova(at)yahoo.com

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