अर्चना वर्मा अर्चना वर्मा की कविताएँ

मारको तुषार और आत्मप्रभा को आशीर्वाद

दिल्ली, 2 जनवरी 2006

मंगलमय हो पंथ तुम्हारे

कहते हैं मन वचन हमारे

नवजीवन के खुले द्वार हों

दिस दिस में मंगल उचार हों

उन द्वारों पर लिखें हुए हों

विजयी नाम तुम्हारे

पड़ी राह तकती हों राहें

मंज़िल खुद फ़ैलाए बाँहें

हर मंज़िल पर दीप जले हों

दूर रहें अँधियारे.

मंगलमय हों पंथ तुम्हारे

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