अशोक सेकसरिया कल्पना पर हिंदी लेखक

अशोक सेकसरिया का संक्षिप्त परिचय

Ashok Seksariaसमाजवादी चिंतक तथा साहित्यकार अशोक सेकसरिया विशिष्ट गांधीवादी व समाजसेवी सीताराम सेकसरिया के ज्येष्ठ पुत्र थे. उनकी स्कूली शिक्षा माहेश्वरी विद्यालय में हुई. उन्होंने दैनिक हिंदुस्तान, जन, दिनमान, वार्ता आदि पत्रिकाओं के लिए काम किया. उनकी लेखनी में आधुनिक समाज का विश्लेषण दिखाई देता है. उन्होंने कई लघु कथाएं भी लिखी हैं. उनका कथा संग्रह ‘लेखकी’ है. श्री सेकसरिया जन, चौरंगी लेन और सामयिक वार्ता के संपादक मंडल में रहे. उनके सामाजिक, राजनीतिक, आर्थिक विषय पर लेख दिनमान में छपते रहे. अशोक सेकसरिया आजीवन अविवाहित रहे और वह बेहद सादगी से रहते थे. वह 82 वर्ष के थे.

अशोक जी का देहांत 29 नवम्बर 2014 को कोलकाता में हुआ.

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मेरी स्मृतियों में अशोक जी - सुनील दीपक

जिन दिनों अशोक जी मेरे पिता श्री ओमप्रकाश दीपक के साथ समाजवादी पत्रिका "जन" में काम करते थे, तब अक्सर वे न्यू राजेन्द्र नगर के हमारे घर में आते थे. उन दोनों को साथ बैठे कर बातें करते या काम करते अकसर देखता था.

1975 में जब अकस्मात मेरे पिता की मृत्यू हुई, तब तक "जन" बन्द हो चुका था और अशोक जी शायद कोलकाता वापस चले गये थे.

उसके बाद जब तक माँ रही, अशोक जी उनका नियमित पत्र व्यवहार चलता रहा. माँ को चिन्ता थी मेरे पिता के लिखे लेखों आलेखों को खोज कर सहेजना व उन्हें छपवाने की चेष्ठा करना. इस सब काम में अशोक जी ही उनके साथी थे. उनके द्वारा सहेजे सम्भाले वे आलेख अभी भी उन्हीं फाइलों में बँधे रखे हैं.

1981 में मुझे कोलकाता जाने का मौका मिला तो उनके पास ही लोर्ड सिन्हा वाले घर पर ही ठहरा था. फ़िर जब मैं इटली चला गया तो अलका सहरावगी के माध्यम से हमारा सम्बन्ध बना था. अलका जी से मैंने कहा कि मेरे पास अशोक जी कोई तस्वीर नहीं तो उन्होंने अशोक जी एक तस्वीर मुझे भेजी थी.

अशोक जी, अलका सहरावगी के साथ

Ashok Seksaria

कुछ माह पहले मैं भारत लौटा तो जाने कितने सालों के बाद टेलीफ़ोन से अशोक जी बात हुई. मैंने उन्हे कहा कि कोलकाता आ कर अवश्य उनसे मिलने आउँगा. वही आखिरी बार थी जब उनसे बात हुई. अन्य लोगों से बातों में बातों में कई बार उनके बारे में बातें होती रहीं. केसला में स्मिता के पास ठहरा तो उसने अशोक जी वहाँ ठहरने के बारे में बताया. बनारस में अफलू व स्वाति जी से बातों में उन्होंने बताया कि अशोक जी "सामयिक वार्ता" के सम्पादन गुट में हैं.

अशोक जी का न रहना, लगता है कि अपने पिता से जुड़े अतीत की अंतिम कड़ी समाप्त हो गयी.

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- 1975 में ओमप्रकाश दीपक की मृत्यू पर अशोक सेकसरिया की श्रद्धाँजलि

- 2011 में भारतीय भाषा परिषद में अंग्रेज़ी के उपयोग पर अशोक जी का पत्र

2014 दिसम्बर - अशोक सेकसरिया की मृत्यू पर कुछ अखबारों तथा फेसबुक पर लिखी श्रद्धाँजलियाँ व संस्मरण प्रस्तुत हैं:

1. अर्चना वर्मा, रमेश दिवेदी, जनसत्ता कोलकाता, प्रियंकर पालीवाल, आशुतोष कुमार, पलाश विश्वास की श्रद्धाँजलियाँ

2. जयशंकर गुप्त, प्रो. रामदेव शुक्ल की श्रद्धाँजलियाँ

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