प्रोफेसर
हरजिंदर सिंह लाल्टू
हैदराबाद में
सैद्धांतिक प्रकृति विज्ञान
(computational natural sciences)
के
प्रोफेसर हैं.
उन्होंने उच्च शिक्षा
प्राप्त की
कानपुर आई आई
टी तथा प्रिंसटन (अमरीका)
विश्वविद्यालय
से.
साथ
ही साथ उनकी रुचि हिंदी,
बंगला तथा
पंजाबी साहित्य तथा
सामाजिक विकास के
क्षेत्रों के साथ भी
जुड़ी हुई है.
हिंदी
साहित्य में
उन्होंने विभिन्न
रचनामक विधाओं में
लिखा है.
अंग्रेज़ी,
बांग्ला और
पंजाबी से कई कहानियाँ,
कविताओं और
आलेखों के अनुवाद
प्रकाशित हुए
हैं और अंग्रेज़ी और
हिन्दी अखबारों में सौ
से अधिक मौलिक आलेख
प्रकाशित हैं.
कई स्वैच्छिक
संस्थाओं के साथ
शिक्षा,
नारी अधिकार ,
नागरिक और
मानव अधिकारों वगैरह
विषयों
पर काम किया
है।
उनकी
बहुर्मुखी
प्रतिभा का अंदाज़
उनकी प्रमुख प्रकाशित
पुस्तकों से मिल सकता
हैः
दो
कविता
संग्रह १.
एक झील थी बर्फ
की (1990
- आधार
प्रकाशन) २.
डायरी में
तेईस अक्तूबर (2004
- रामकृष्ण
प्रकाशन) एक
कहानी संग्रह घुघनी
(1996
- अभिषेक
प्रकाशन) बाल
साहित्य कविता संग्रह:
भैया
ज़िंदाबाद अनुवाद:
सुकुमार राय
-
हयवरल,
अगड़म-बगड़म
उपेंद्रकिशोर
रायचौधरी -
गोपी गवैया
बाघा बजैया नैंसी हेडॉक-
नकलू नडलू
बुरे फँसे अफ्रीकी
अमरीकी लोक कथा-
लोग उड़ेंगे नव साक्षरों
के लिए
कविता संग्रह:
देश बड़ा कब
होता है नाटक
भाप ताप और आप प्रमुख अनुवाद
हावर्ड ज़िन
की पुस्तक 'A
People's History of the United States' के
बारह अध्यायों
का अनुवाद (विभिन्न
पत्रिकाओं में
प्रकाशित)
(1) चार
कविताएँ- दिसम्बर
2007 में गुजरात
चुनावों के समय लिखीं लाल्टू जी की चार
कविताएँ जो जनसत्ता में छपीं थीं, पीडीएफ
फोरमेट
(PDF format)
में. जनवरी 2008
में मुझे हैदराबाद में लाल्टू जी से मिलने का
मौका मिला था, उस समय उन्होंने यह चार कविताएँ
पढ़ कर सुनाईं, जिसकी रिकार्डिंग भी आप सुन
सकते हैं - लाल्टू की
चार कविताएँ
उन्हीं की आवाज़ में, एमपी तीन फोरमेट में.
अगर आप को यहाँ से
लाल्टू जी के स्वर उनका कविता पाठ पढ़ने में
कठिनाई हो तो इसे आप
इंटरनेट आर्काईव के जालस्थल पर भी सुन
सकते हैं.
(6)
कुछ
अन्य कविताँए
(एक्रोबेट
पीडीएफ रुप में --
अड्डे पर
कविता,
एक और औरत,
घर और बाहर,
जीवन,
पेड़ों को
गर्मी नहीं लगती?,
डायरी के
पन्नों में,
मनस्थिति,
आकांक्षा,
कब से, 50 KB)