डा. सावित्री सिन्हा का लेखन कल्पना का हिन्दी लेखन जगत

डॉ. सावित्री सिन्हा का जन्म १९२२ में इलाहबाद जिले के जसरा जिले में हुआ था, जहाँ उनके पिता द्वारका प्रसाद रेलवे के लिए काम करते थे। वह आठ साल की थीं जब उनके पिता का देहांत हुआ। उन्हें उनकी मां श्रीमति जयदेवी ने पाला जिन्होंने विधवा होने के बाद एक प्राथमिक विद्यालय में पढ़ाना शुरु किया। १९४१ में उनका विवाह श्री रामेश्वर नारायण सिन्हा के साथ हुआ जो दिल्ली में पोस्टमास्टर थे। विवाह के बाद भी सावित्री ने पढ़ाई जारी रखी।

Dr. Savitri Sinhaस्व. डा. सावित्री सिन्हा ने लखनऊ विश्वविद्यालय से डी. लिट. किया था। उन्नीस सौ साठ के दशक में उन्होंने पहले दिल्ली के इन्द्र प्रस्थ कोलिज में पढ़ाया फ़िर दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में पहले रीडर बनी, फ़िर विभागाध्यक्ष। उनकी ठहाकेदार हँसी विश्वविद्यालय में मशहूर थी। उनकी बहुप्रशंसित किताबों में "ब्रजभाषा के कृष्णभक्ति काव्य अभिव्यंजना शिल्प" और "युगचारण दिनकर" भी हैं। उनके अतिरिक्त उन्होंने नागरी प्रचारणी सभा वाराणसी द्वारा छापी हिन्दी साहित्य का बृहत इतिहास पुस्तक श्रृंखला में ग्यारहवें भाग (हिन्दी साहित्य का उत्कर्षकाल - नाटक सं. १९७५ से ९५ तक) का सम्पादन भी किया था। यहां पर डा. सावित्री सिन्हा के कुछ आलेख प्रस्तुत हैं जो उनके 1966 में दिल्ली के नेश्नल प्रिंटिंग प्रेस द्वारा छपे आलेख संग्रह तुला और तारे से लिए गये हैं.

ब्रजभाषा के कृष्णभक्ति काव्य अभिव्यंजना शिल्प - भूमिका

नेशनल पब्लिशिन्ग हाउस दिल्ली से १९६२ में छपी इस किताब को उन्होंने अपने माता-पिता को इन शब्दों के साथ समर्पित किया था - स्वर्गीय पिता जी की आंसूभरी, धूमिल बाल-स्मृतियों को तथा मां के असीम साहस, धैर्य, त्याग और वात्सल्य को। यहां आप इस किताब की भूमिका को तीन भागों में पढ़ सकते हैं।

भाग १: अभिव्यंजना की परिभाषा

भाग २: सूरदास से पूर्व कृष्ण-भक्ति काव्य में अभिव्यंजना-शिल्प की स्थिति - एक विहंगावलोकन

भाग ३: कृष्ण-काव्य परम्परा के विकास का संक्षिप्त परिचय

आप इस पूरे आलेख को पीडीएफ में डाउनलोड भी कर सकते हैं।

डॉ. सावित्री सिन्हा के बारे में

डॉ. सावित्री सिन्हा की छोटी बेटी मधु सिन्हा कामथ ने सन् २०१८ में अपने बचपन और पारिवारिक जीवन के बारे में कुछ संस्मरण लिखे थे जिनमें डॉ. सिन्हा के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी थी, आप उन संस्मरणों को भी पढ़ सकते हैं।

डॉ. सावित्री सिन्हा के आलेख

नयी पीढ़ी : दो ऐंगलों से

आधुनिक वेश भूषा : नयी पीढ़ी

बापू: कुछ स्मृतियाँ - सियारामशरण गुप्त

जिया, राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की पत्नी

पूज्य दद्दा, अंतिम बार

पूज्य दद्दा, अंतिम श्रद्धाँजलि

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