बच्चों की रोटीः एक सुबह बोलोनिया में सुनील दीपक, अगस्त 2005

शुक्रवार की रात को ही सारा प्रोग्राम बना लिया था, इतने सारे काम जो करने थे. नया पर्स खरीदना, बैग पर चिपकाने के लिए एक पैच का टुकड़ा खरीदना, बोलोनिया की नहर का खुला हिस्सा खोजना, नैपच्यून की मुर्ती की तस्वीर खींचना और एशियाई दुकान से मसाले खरीदना इत्यादि.

सुबह पहले कुत्ते को घुमाने ले गया. घर के पास एक सड़क हाईवे के करीब जाती है, उस तरफ गया था. देखा हाईवे का बुरा हाल था. कारों की लाईन लगी थी, एक के पीछे दूसरी, अंतहीन. कारों में बैठे लोगों के चेहरे देख कर दया भी आयी, हँसी भी. क्या डाक्टर ने कहा था कि गरमियों की छुट्टियों के पहले दिन सुबह सुबह इस तरह निकल पड़ो ? सभी इटली के पूर्वी समुद्र तट की ओर छुट्टियाँ मनाने जा रहे हैं जहाँ बहुत से शहर गरमियों की इन दो‍ तीन महीनो की कमाई से सारा साल जीते हैं.

घर वापस आया तो टेलीविजन पर सुना की बोलोनिया के पास हाईवे पर करीब 20 किलोमीटर की कारों की लाईन है और लोगों को सलाह दी जा रही कि वे आज न निकल कर, अपनी छुट्टियां कल से प्रारम्भ करें. खैर मेरे पास कहाँ समय था कि मैं कारों में फंसे लोगो की चिंता करता, इसलिए घर के पास से बस पकड़ी और पहुँच गया बोलोनिया शहर के बीचों बीच मोनतान्योला, यानी छोटी पहाड़ी पर.

मोनतान्योला की पहाड़ी टूटे घरों, दीवारों आदि के मलबे से बनी है. बहुत सा मलबा बोलोनिया की प्राचीन दीवार के तोड़ने से आया था. यानि यहाँ कूड़े का ढेर होता था जिस पर पहाड़ी बना कर ढक दिया गया. ऊपर जाने की सीड़ियाँ श्री पिनचियो नाम के आर्कि्टेक्ट ने बनायी थीं और पहाड़ी के ऊपर बनाया एक बाग. नये बाग और भव्य सीड़ियों का उदघाटन करने, सन् 1938 में इटली के राजा विक्टोरियो ऐमनूएले और तत्कालीन प्रधानमंत्री मुसोलीनी आये थे. प्रधानमंत्री की खुली कार पर चलायी गोली एक 14 वर्षीय बालक ने, सड़क के किनारे एक घर की खिड़की से पर मुसोलीनी जी बच गये और बालक को लगी फाँसी शहर के मुख्य चौबारे पियात्ज़ा मेजोरे में, नैपच्यून की मूर्ती के सामने. मुसोलीनी की मौत को अभी 5 साल बाकी थे, उन्हें तो द्वितीय महायुद्ध के बाद इटली के फाशिस्ट शासन से लड़ने वाले स्वतंत्रा सैनानियों के हाथों मरना था. पर इस बात से स्पष्ट है मुसोलीनी के फासीवाद के विरुद्ध बोलोनिया में काफ़ी पहले से ही विरोध हो रहा था.

प्रस्तुत हैं कुछ तस्वीरें इसी बाग की.

Bologna, Italy

Bologna, Italy

Bologna, Italy

Bologna, Italy

8 अगस्त स्क्वायर ठीक मोनतान्योला के पीछे और नीचे है और यहाँ पिछले तीन सौ सालों से एक बाजार लगता है. आजकल इस बाजार का दिन है शनिवार. सुबह सुबह दूर दूर से बेचने और खरीदने वाले यहाँ आ जाते हैं. बाजार का अर्थ है शोर, संगीत, विभिन्न रंग और भीड़. करीब दो साल के बाद यहाँ आया हूँ, पर इन दो सालों में इस बाजार में बहुत बदलाव आ गया है.

हर तरफ भारतीय, चीनी, पाकिस्तानी, बंगलादेशी प्रवासी लोगों का बोलबाला है. बिकती हुई चीज़े भी बदल गयीं हैं, कहीं अफ्रीकी बाटिक और ढ़ोल, कहीं भारतीय कपड़े, कहीं तुर्की की बनियाने, कहीं चीन से स्वेटर, खिलौने और जूते. एक जगह से, जहाँ कुछ पाकिस्तानी दुकाने थीं, "चुरा के दिल मेरा, गोरिया चली" के संगीत की आवाज़ आ रही थी और उनके करीब ही बंगलादेशी दुकान बंगाली संगीत सुनवा रहे थे. एक पल के लिए लगा मानो दिल्ली के करोलबाग में हूँ. यह सब भूमण्डलीकरण से होने वाले परिवर्तनों के प्रतीक हैं.

दुकानों के बीच अचानक एक बोर्ड दिखा जिस पर एक बच्चे की तस्वीर है, हाथ में बोलोनिया में बनायी जानी वाली लम्बी स्थानीय रोटी और नीचे लिखा है "हमारे काम करने वालों की रोटी Bologna, Italyन छीनिये, कृपया इतालवी चीज़े ही खरीदये". कैसे बचायेंगे ये लोग अपनी रोटी ? जहाँ इतालवी स्टाल पर जो चीज़ 6 या 8 यूरो की मिलती है, पाकिस्तानी, चीनी और भारतीय उसे 1 या 2 यूरो में बेचते हैं. सवाल केवल रोटी का नहीं है, सारा जीवन बिताने का अंदाज़ ही बदल रहा है. इतालवी दुकानदार, छुट्टी और आराम से काम करने में विश्वास करते हैं, जब पूर्व से आये नये दुकानदार सारा दिन दुकान खोले रखते हैं, कोई छुट्टी नहीं लेते, रात को देर से दुकान में ही सो जाते हैं, तो कैसे मुकाबला करेंगे ये लोग ?

प्रस्तुत हैं दो तस्वीरें इस बाज़ार की.

Bologna, Italy

Bologna, Italy

बोलोनिया खोयी हुई नहरों का शहर है. एक जमाने में सारा शहर इन नहरों से भरा हुआ था जैसे कि वेनिस, पर आज वो सभी नहरें सड़कों और इमारतों के नीचे छुप गयीं हैं, विषेशकर शहर Bologna, Italyके पुराने भाग में. मेरा खयाल था कि शहर के इस हिस्से में अब कोई भी नहर खुली नहीं दिखायी देती. फिर पुस्कालय से लायी एक पुरानी किताब में पढ़ा कि एक पुरानी गली है जहाँ एक छोटा सा हिस्सा है नहर का जो आज भी खुला है. नक्शे पर ढ़ूंढ़ कर देखा तो लगा कि वह जगह 8 अगस्त चौबारे के करीब ही कहीं होगी.

नहर को खोजने निकला तो कुछ चलना पड़ा पर अंत में उसे खोज ही लिया. घरों के बीच में से नहर यूँ बहती है जैसे वेनिस की नहरें हैं.

अब बारी है नेपच्यून की मूर्ती की. यह वह नहीं जो आप सोच रहें हैं. थोड़ा सा घूम कर देखिये तो बात समझ में आ जाती है.

Bologna, Italy

यह है शहर के बीचों बीच बनी फ्राँसिसी शिल्पकार जानबोलोन्या की बनायी समुद्री देवता नैपच्यून की पँद्रहवीं शताब्दी की नग्न मूर्ती जिसपर कुछ लोगों ने एतराज़ किया था कि इसकी नग्नता से अभद्रता फैलेगी इसलिए मूर्ती को शहर के बीच में लगाना ठीक नहीं. इस बात पर बहुत बहस हुई तो अंत में जनमत करवाया गया, और जनता का कहना था कि मूर्ती शहर के बीच में ही लगनी चाहिये. तो फ़िर शालीनता के रक्षकों ने कहा कि अच्छा अगर शहर के बीच में ही लगानी है तो कम से कम, यौन अँग वाले भाग को पत्ते से ढक दिया जाना चाहिये. दोबारा जनमत हुआ और जनता ने कहा कि नहीं, मूर्ती के खुले यौन अँगों में कोई अश्लीलता नहीं, उन्हें ढकने की कोई आवश्यकता नहीं.

Bologna, Italy

Bologna, Italy

******

कल्पना पर सुनील दीपक के अन्य आलेख - कल्पना पर हिंदी लेखन की पूरी सूची