यौनता और प्रजनन पर नवजवानों के विचार - ब्राज़ील से एक महत्वपूर्ण शौध सुनील दीपक, 06 अगस्त 2006

ब्राज़ील की चिकित्सा विज्ञान की पत्रिका "कादेर्नोस दे साउदे पुबलिका" (Cadernos de saude Publica) के जुलाई 2006 अंक में यौन विषय से जुड़े हुए एक महत्वपूर्ण शौध ग्रवाद (GRAVAD) के बारे में विभिन्न आलेख छपे हैं. यौन विषयों पर शौध करना कठिन है और बहुत से देशों में नामुमकिन सा है. अक्सर Journal coverनैतिकता की बात उठा कर या यह कह कर कि इस तरह की बातें करने से अनैतिक आचरण को बढ़ावा मिलता है, इन बातों को दबा दिया जाता है और इन बातों को उठाने वालों के विरुद्ध अश्लीलता का आरोप लगा कर अदालत में मुकदमे कर दिये जाते हैं.

एक विषम लैंगिक (heterosexual) या समलैंगिक (homosexual) युगल के बीच में अपनी सहमती से यौन सम्पर्क के दौरान क्या होता है, उसे जानने के लिए प्रश्न पूछने के लिए उत्तर देने वालों को साहस दिखाना ही पड़ता है, यह प्रश्न पूछना भी आसान नहीं है. बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि यौन विषय पर बात करना गलत है और मन की गहराई में दबा यह अपराध बोध हमें इस विषय के बारे में न तो तर्कसंगत ढँग से सोचने देता है न ही इस पर किसी जनमँच पर बहस हो पाती है.

पर अगर एडस जैसी बीमारी के या यौन सम्बँधों से फ़ैलने वाले रोगों के बारे में सोचा जाये तो यह स्पष्ट है कि बिना जाने किसी बात को रोकने और निवारण करने के रास्ते खोजना असँभव है. ब्राज़ील का यह शौध कार्य इसी लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शौध बहुत से यौन विषय से जुड़े समाज वर्जित क्षेत्रों में प्रश्न पूछने की हिम्मत कर पाया है.

यौन शौध का इतिहास - भारत और चीन जैसी प्राचीन सभ्यताओं ने यौन सम्बँध के विषय की महत्वपूर्णता को समझ कर कामसूत्र जैसे ग्रँथो का निर्माण किया. मध्ययुग में इस्लाम के प्रभाव से और पिछले तीन सौ वर्षों में विकटोरियन विचार धारा के प्रभाव से भारत में भी बदलाव आया और यौन विषयों को जन माध्यमों की रोशनी से दूर अँधेरे में लज्जा और अपराधबोध की जँजीरों में कैद कर दिया गया. इस प्रभाव को भारतीय महाद्वीप में पाये जाने वाले सभी धर्मों ने आत्मसात कर लिया और आज परमपरागत हिंदू समाज मानव शरीर, विषेशकर स्त्री शरीर, और यौनता (sexuality) को छुपा कर रखने की बात मानता है.

आधुनिक युग में यौन विषय पर शौध करने का श्रेय अमरीकी जीववैज्ञानिक श्री किनसे (Kinsey) को जाता है, जिन्होंने स्त्रियों और पुरुषों के व्यक्तिगत यौन सम्बँधों (sexual relations) के इतिहासों को इक्ट्ठा करने का काम किया. किनसे जी विवाह से बाहर यौन सम्बँधों के विरुद्ध नैतिक और कानूनी निषेधों के बारे में सोच रहे थे और जानना चाहते थे कि जिन बातों को समाज और कानून गलत मानते थे, उन्हें आम व्यक्ति अपने जीवन में किस तरह जीता था? उन्होने यह शौध 1938 में प्रारम्भ किया और पुरुष यौनता (male sexuality) के बारे में उनके शौध का पहला भाग 1948 में छपा. उसके पाँच वर्षों के बाद इस शौध का दूसरा भाग छपा जिसमे स्त्री यौनता (female sexuality) के विषय पर जानकारी थी. यह आधुनिक वैज्ञनिक युग में पहली बार हो रहा था कि यौनता के विषय पर बात बिना नैतिकता या प्राकृतिकता के सवालों के, निष्पक्ष तरीके से की गयी थी.

ग्रवाद शौध के निष्कर्ष - मेरे इस आलेख का ध्येय इस शौध से उठने वाले मुद्दों को प्रस्तुत करना है.

पुरुष के लिए पहले यौन सम्बँध का महत्व - इस शौध में 18 से 18 वर्ष के युवकों से उनके पहले यौन सम्बँधों के बारे में जानकारी माँगी गयी. इस शौध ने दिखाया कि पुरुषों के लिए पहला यौन सम्बँध उन्हें अपने शरीर के बारे में, अपने सामाजिक भूमिका के बारे में जानकारी देता है. पुरुषों को किताबी जानकारी हो सकती है कि मैथुन कैसे होता है, पर साथ ही डर भी होता है कि उनके पुरुष अंग में मैथुन करने की क्षमता है या नहीं.

पहले मैथुन के दौरान वे सीखते हैं कि शरीर के अँगों को किस तरह से प्रयोग किया जाये और स्त्री पुरुष सम्बँधों के सामाजिक नियम क्या होते हैं. यह सभी बातें उनकी मानसिक परिपक्वता को बनाने में सहायक होती हैं. पहले यौन सम्बँध से पुरुष सीखता है कि उसके पुरुष होने का क्या अर्थ है, यह समझ केवल मैथुन क्रिया के दौरान नहीं आती बल्कि उसके पहले और बाद के समय में बनती है. अगर स्त्री साथी को यौन सम्बँधों का पहले से अनुभव है तो पुरुष के लिए पहला यौन सम्बँध आसान हो सकता है.

मैथुन में कण्डोम का प्रयोग - शौध के इस भाग ने दिखाया कि 18 से 24 वर्ष के ब्रज़िली नवजवानो में से 80.7 प्रतिशत युवतियों ने पहले मैथुन सम्बँध में कण्डोम का प्रयोग किया जबकि युवकों में 88.6 प्रतिशत ने कन्डोम का प्रयोग किया. पर जब यह पूछा गया कि अंतिम यौन सम्बँध में कण्डोम का प्रयोग किया गया या नहीं तो मात्रा बहुत कम थी, 38% युवतियों ने और 56% पुरुषों ने कण्डोम प्रयोग को स्वीकारा. इस निष्कर्ष का यह अर्थ हो सकता है कि पहला यौन सम्बँध जब यौन साथी के बारे में जानकारी कम होती है, अधिक सावधानी बरती जाती है जबकि एक बार यौन सम्बँध नियमित रुप से होने लगें तो सावधानी कम हो जाती है. इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि अनुभव के साथ, स्त्री और पुरुष दोनो ही लापरवाह हो जाते हैं, सोचते हें कि उन्हें कोई खतरा नहीं हो सकता.

नवजवानों का यौन आचरण - शौध के इस भाग ने विषमलैंगिक यौन आचरण (hetrosexual sexual behaviour) के विभिन्न पहलुओं को परखा. पहला पहलु था मैथुन क्रिया के बारे में. यौनी मैथुन (vaginal sex) सबसे प्रचलित यौन क्रिया पायी गयी. शौध ने यह भी दिखाया कि यौन आचरण उम्र और अनुभव के साथ बढ़ता रहता है, नयी तकनीकें सीखना और प्रयोग करना युगल के बीच में सम्बँधों पर भी निर्भर करता है.

करीब 18 प्रतिशत युवतियों ने और 11 प्रतिशत युवकों ने कहा कि उन्होंने मुख मैथुन (oral sex) का कभी अनुभव नहीं किया था. पुरुष अंग से मुख मैथुन (fellatio) के बारे में 70 प्रतिशत युवतियों ने माना कि उन्होंने अपने साथी को किया, जबकि 85 प्रतिशत युवको ने माना कि उनके साथी ने उनके साथ किया. स्त्री यौन अंग से मुख मैथुन (cunnilingus) के प्रश्न पर 79 प्रतिशत युवतियों ने और 81 प्रतिशत पुरुषों ने स्वीकारा.

24 प्रतिशत युवतियों ने और 11 प्रतिशत युवकों ने कहा कि मैथुन के दौरान उनके साथी ने कभी हाथ से उनके यौन अँगों को छू (partners masturbatrion) कर यौन सुख नहीं पहुँचाया.

75 प्रतिशत युवतियों ने और 40 प्रतिशत युवकों ने कहा कि उन्होंने कभी गुदा मैथुन (anal sex) का अनुभव नहीं किया. शौध के अनुसार ब्राजील में गुदा मैथुन को यौन अनुभवों का सामान्य भाग माना जाता है और अन्य देशों में हुए शौध के मुकाबले में ब्राज़ील में अधिक नवजवानों ने इस अनुभव को स्वीकारा. फ्राँस के ACSF सर्वेक्षण में 26 प्रतिशत पुरुषों ने और 20 प्रतिशत स्त्रियों ने गुदा मैथुन अनुभव को स्वीकारा था जबकि अमरीका में हुए NHSLS सर्वेक्षण के हिसाब से 16 प्रतिशत युवक और युवतियों ने गुदा मैथुन के अनुभव को स्वीकारा था. उनके मुकाबले में ब्राजील में 60 प्रतिशत युवकों ने और 25 प्रतिशत युवितयों ने गुदा मैथुन के अनुभव को स्वीकारा.

इन निष्कर्षों से पहली बात तो यह स्पष्ट होती है कि युवक और युवतियाँ भिन्न बात बता रहे हैं, इसका अर्थ यह भी हो सकता है कि गुदा मैथुन और मुख मैथुन जैसे विषयों पर ब्राज़ील जैसे खुले विचारों वाले समाज में भी आसान नहीं है, पर यौन सम्बँधों में ये क्रियाएँ वहाँ प्रचलित हैं. अगर युवतियाँ इन विषयों पर सही उत्तर देने में झिझकती हों, यह भी हो सकता है कि युवक इन विषयों पर डींग मारने के लिए बढ़ा चढ़ा कर कह रहे हों.

अंतिम टिप्पणी - विभिन्न समाजों में यौन सम्बँधों की बात नैतिकता से जोड़ कर ही सोची जाती है. यौन सम्बँधों में क्या सही है या क्या गलत है, इस पर कानून बना कर उन्हें दण्डनीय बनाने के भी प्रयास होते हैं, जैसा कि भारत का एक कानून है जो गुदा मैथुन को "अप्राकृतिक" कह कर उसे गैरकानूनी और दण्डनीय बताता है.

अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सभी मानते हैं कि जो लोग अपनी रक्षा खुद नहीं कर सकते या अपने निर्णय स्वयं लेने की क्षमता नहीं रखते, जैसे बच्चे, नाबालिग किशोर या गंभीर रुप से मानसिक अविकास से ग्रस्त लोग, उनकी रक्षा के लिए कानून होना चाहिए. इसके अतिरिक्त एक युगल अपनी इच्छा से, बिना हिंसा या जबरदस्ती के, अपनी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के एकांत में क्या करता है यह उनका निजी मामला है और कोई कानून इसमें दखल नहीं दे सकता. किसी यौन क्रिया को अवैधानिक या गैरकानूनी कहने से, उसके बारे में समझ पाने और उसके लिए आवश्यकता पड़ने पर जनता को जानकारी देना असँभव हो जाता है.

एडस और यौन सम्पर्कों से फ़ैलने वाले रोगों की रोकथाम के लिए, नैतिकता के मुखोटे के पीछे से छुपने की नहीं, यौनता के बारे में ठीक जानकारी पाना और देना आवश्यक है. ब्राज़ील का ग्रवाद सर्वेक्षण का शौध इसी दिशा में एक कदम है जो ब्रज़ील के जन स्वास्थ्य अभियान को इन बीमारियों से बचने की राह दिखाने में सहायता करेगा.

******

यौन विषयों पर अन्य लेख - कल्पना पर हिंदी लेखन की पूरी सूची